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सही पोषण न मिलने से बच्चों को क्या परेशानियां हो सकती हैं?

बच्चों की अच्छी सेहत और सही विकास के लिए पौष्टिक भोजन बहुत जरूरी होता है। बचपन ऐसा समय है जब शरीर और दिमाग दोनों तेजी से विकसित होते हैं। इस दौरान बच्चे को सिर्फ पेट भरने के लिए खाना देना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसके भोजन में अलग-अलग तरह के पोषक तत्व भी होने चाहिए।
अगर बच्चे को लंबे समय तक पर्याप्त और संतुलित भोजन नहीं मिलता है, तो इसका असर उसके वजन, लंबाई, ऊर्जा, सीखने की क्षमता और सामान्य स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। हालांकि, हर बच्चे में इसका असर एक जैसा नहीं होता। कई बार किसी समस्या के पीछे पोषण के अलावा दूसरा स्वास्थ्य कारण भी हो सकता है।
इसलिए माता-पिता के लिए यह समझना जरूरी है कि बच्चे के भोजन में किन चीजों को शामिल करना चाहिए और पोषण की कमी के कौन-कौन से संकेत दिखाई दे सकते हैं।

बच्चों के लिए सही पोषण क्यों जरूरी है?

बच्चे के शरीर को बढ़ने और रोज की गतिविधियां करने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है। इसके अलावा शरीर को प्रोटीन, विटामिन, खनिज, स्वस्थ वसा, फाइबर और पानी जैसे पोषक तत्व भी चाहिए।
प्रोटीन शरीर के विकास और मांसपेशियों के लिए जरूरी होता है। कैल्शियम और विटामिन D हड्डियों और दांतों के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आयरन शरीर में खून बनाने के लिए जरूरी होता है, जबकि अलग-अलग विटामिन और खनिज शरीर की कई सामान्य प्रक्रियाओं में मदद करते हैं।
इसीलिए बच्चे को रोज एक ही तरह का भोजन देने के बजाय अलग-अलग खाद्य पदार्थों को संतुलित तरीके से शामिल करना बेहतर होता है।

सही पोषण न मिलने से बच्चों को क्या परेशानियां हो सकती हैं?

बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन और स्वस्थ आहार


लंबे समय तक पर्याप्त या संतुलित पोषण न मिलने पर बच्चों में अलग-अलग तरह की समस्याएं दिखाई दे सकती हैं। इनका असर बच्चे की उम्र, भोजन की मात्रा, पोषक तत्वों की कमी और उसके सामान्य स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।

1. वजन और लंबाई के विकास पर असर

बचपन में बच्चे का वजन और लंबाई लगातार बढ़ते हैं। इसके लिए शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और पोषक तत्वों की जरूरत होती है।
अगर बच्चे को लंबे समय तक पर्याप्त भोजन नहीं मिलता है, तो उसकी उम्र के अनुसार होने वाली वृद्धि प्रभावित हो सकती है। कुछ बच्चों का वजन कम रह सकता है या उनकी लंबाई की वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी हो सकती है।
लेकिन सिर्फ कम वजन देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि बच्चे को पोषण की कमी है। बच्चे की वृद्धि को उसकी उम्र, लंबाई, वजन और विकास के दूसरे पहलुओं के आधार पर देखा जाता है।
अगर माता-पिता को लगे कि बच्चे का विकास सामान्य तरीके से नहीं हो रहा है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

2. बच्चा जल्दी थक सकता है

अगर बच्चे को पर्याप्त ऊर्जा और पोषक तत्व नहीं मिल रहे हैं, तो उसे कमजोरी या थकान महसूस हो सकती है।
ऐसा बच्चा खेलने या सामान्य गतिविधियों में जल्दी थक सकता है। कुछ बच्चों में सुस्ती या ऊर्जा की कमी भी दिखाई दे सकती है।
हालांकि, लगातार थकान का कारण केवल भोजन की कमी नहीं होता। नींद पूरी न होना, संक्रमण, एनीमिया या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी इसकी वजह हो सकती हैं।
इसलिए अगर बच्चा लगातार कमजोर या थका हुआ दिखाई दे रहा है, तो कारण जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।

3. आयरन की कमी से एनीमिया का खतरा

बच्चों के लिए आयरन एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। शरीर में आयरन की कमी होने पर एनीमिया यानी खून की कमी हो सकती है।
एनीमिया होने पर बच्चे को थकान, कमजोरी या चिड़चिड़ापन जैसी परेशानी हो सकती है। कुछ बच्चों में ध्यान लगाने में भी परेशानी महसूस हो सकती है।
आयरन की कमी का पता केवल लक्षण देखकर नहीं लगाया जा सकता। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर जांच की सलाह दे सकते हैं।
बच्चे के भोजन में दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, चना, राजमा और उम्र के अनुसार अन्य आयरन वाले खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं।

4. हड्डियों के विकास पर असर

बच्चों की हड्डियां बचपन में तेजी से विकसित होती हैं। इसलिए कैल्शियम और विटामिन D जैसे पोषक तत्व महत्वपूर्ण होते हैं।
अगर बच्चे के आहार में लंबे समय तक जरूरी पोषक तत्वों की कमी रहती है, तो हड्डियों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
दूध, दही और अन्य डेयरी उत्पाद कैल्शियम के स्रोत हो सकते हैं। बच्चे की उम्र और जरूरत के अनुसार दूसरे खाद्य पदार्थ भी भोजन में शामिल किए जा सकते हैं।
अगर बच्चे की हड्डियों या चलने-फिरने को लेकर कोई असामान्य समस्या दिखाई दे, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।

5. रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ सकता है

संतुलित भोजन शरीर को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करता है। लंबे समय तक पोषण की कमी होने पर शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा क्षमता प्रभावित हो सकती है।
ऐसे में बच्चा संक्रमण से लड़ने में कमजोर हो सकता है, लेकिन बार-बार सर्दी-जुकाम या संक्रमण होने का मतलब हमेशा पोषण की कमी नहीं होता।
बच्चे के भोजन में मौसमी फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ शामिल करना संतुलित आहार का हिस्सा हो सकता है।

6. पाचन से जुड़ी परेशानी

बच्चों के भोजन में फाइबर की कमी और पर्याप्त पानी न पीने से कब्ज जैसी समस्या हो सकती है।
अगर बच्चा फल और सब्जियां बहुत कम खाता है और उसकी जगह केवल पैकेट वाले स्नैक्स या बहुत कम फाइबर वाला भोजन लेता है, तो उसके भोजन की गुणवत्ता को सुधारने की जरूरत हो सकती है।
फल, सब्जियां, साबुत अनाज और पर्याप्त पानी पाचन को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं।
अगर कब्ज लंबे समय तक रहती है, दर्द बहुत ज्यादा है या बच्चे को मल त्याग करने में लगातार परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

7. मांसपेशियों के विकास पर असर

बच्चों के शरीर के विकास के लिए प्रोटीन महत्वपूर्ण है। शरीर को मांसपेशियों सहित कई ऊतकों के निर्माण और रखरखाव के लिए प्रोटीन की जरूरत होती है।
अगर बच्चा लंबे समय तक पर्याप्त भोजन नहीं करता या उसके भोजन में प्रोटीन के अच्छे स्रोत बहुत कम हैं, तो उसके शारीरिक विकास पर असर पड़ सकता है।
दाल, दूध, दही, पनीर, अंडा और अन्य प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ बच्चे की उम्र और परिवार के भोजन के अनुसार शामिल किए जा सकते हैं।

8. पढ़ाई और ध्यान पर असर पड़ सकता है

बच्चे को पढ़ाई, खेलने और दूसरी गतिविधियों के लिए पर्याप्त ऊर्जा चाहिए।
अगर बच्चा भूखा रहता है या उसके भोजन में जरूरी पोषक तत्वों की कमी है, तो थकान के कारण उसे पढ़ाई में ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है।
लेकिन बच्चे के पढ़ाई में कमजोर होने या ध्यान न लगाने का कारण सिर्फ भोजन नहीं होता। नींद, तनाव, पढ़ाई का माहौल और कई अन्य कारण भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं।
इसलिए समस्या लगातार बनी रहे तो केवल भोजन को दोष देने के बजाय बच्चे की पूरी दिनचर्या पर ध्यान देना चाहिए।

9. त्वचा और बालों में बदलाव

कुछ गंभीर पोषण संबंधी कमियों का असर त्वचा और बालों पर भी दिखाई दे सकता है। बालों का कमजोर होना या त्वचा में बदलाव कई कारणों से हो सकता है।
इसलिए ऐसे लक्षण दिखाई देने पर इंटरनेट से देखकर बच्चे को कोई विटामिन या सप्लीमेंट देना सही नहीं है। पहले डॉक्टर से कारण जानना बेहतर है।

बच्चों को संतुलित भोजन में क्या-क्या दें?

बच्चे को स्वस्थ रखने के लिए भोजन में अलग-अलग खाद्य समूहों को शामिल करना चाहिए। हर बच्चे की उम्र और जरूरत अलग होती है, इसलिए भोजन की मात्रा भी उसी के अनुसार होनी चाहिए।
आम तौर पर बच्चे के भोजन में इन चीजों को शामिल किया जा सकता है:
दाल, चना, राजमा और अन्य प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ
दूध, दही और पनीर जैसे डेयरी उत्पाद
मौसमी फल
हरी और रंगीन सब्जियां
गेहूं, चावल, दलिया और अन्य अनाज
अंडा या परिवार द्वारा खाए जाने वाले अन्य प्रोटीन स्रोत
मेवे और बीज, अगर बच्चे की उम्र के अनुसार सुरक्षित हों
पर्याप्त मात्रा में पानी
बच्चे को एक ही भोजन बार-बार देने के बजाय अलग-अलग स्वस्थ विकल्प देना अच्छा तरीका हो सकता है।

क्या बच्चों को समय पर भोजन देना जरूरी है?

बच्चों के लिए नियमित भोजन की आदत बनाना उपयोगी होता है। बहुत लंबे समय तक भोजन न मिलने से बच्चे को भूख, चिड़चिड़ापन या कमजोरी महसूस हो सकती है।
माता-पिता बच्चे की उम्र और दिनचर्या के अनुसार भोजन और स्वस्थ स्नैक का समय तय कर सकते हैं।
बच्चा कभी-कभी कम खाना खाए तो तुरंत चिंता करने की जरूरत नहीं होती। बच्चों की भूख दिन-प्रतिदिन बदल सकती है। लेकिन अगर बच्चा लंबे समय से खाना नहीं खा रहा है या उसका वजन और विकास प्रभावित हो रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

बच्चे को खाना खिलाते समय किन बातों का ध्यान रखें?

बच्चे को खाना खिलाते समय सिर्फ मात्रा पर ध्यान देना जरूरी नहीं है। भोजन की गुणवत्ता और बच्चे की उम्र के अनुसार सुरक्षित भोजन देना भी महत्वपूर्ण है।

माता-पिता को कोशिश करनी चाहिए कि:
घर का संतुलित भोजन बच्चे की रोज की डाइट का हिस्सा रहे।
फल और सब्जियों की आदत धीरे-धीरे विकसित की जाए।
बहुत ज्यादा मीठे पेय और अत्यधिक पैकेज्ड स्नैक्स को रोज की डाइट का मुख्य हिस्सा न बनाया जाए।
बच्चे को पर्याप्त पानी दिया जाए।
खाना खाते समय बच्चे को आराम से खाने का समय दिया जाए।
छोटे बच्चों को ऐसा भोजन न दिया जाए जिससे उनके गले में फंसने का खतरा हो।

अगर बच्चा पौष्टिक खाना नहीं खाना चाहता तो क्या करें?

यह समस्या बहुत से माता-पिता के सामने आती है। बच्चे को जबरदस्ती खाना खिलाने के बजाय अलग-अलग स्वस्थ विकल्पों को छोटे हिस्सों में देना बेहतर तरीका हो सकता है।
उदाहरण के लिए अगर बच्चा कोई सब्जी नहीं खाता, तो उसे किसी दूसरे तरीके से भोजन में शामिल करने की कोशिश की जा सकती है।
बच्चे को परिवार के साथ बैठाकर खाना खिलाना और माता-पिता का खुद स्वस्थ भोजन खाना भी अच्छी आदत बनाने में मदद कर सकता है।

कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?

अगर बच्चे का वजन या लंबाई अपेक्षित रूप से नहीं बढ़ रही है, बच्चा लगातार कमजोर रहता है, बहुत जल्दी थक जाता है, लंबे समय से भूख नहीं लगती, बार-बार बीमार पड़ता है या उसके व्यवहार और सामान्य गतिविधियों में लगातार बदलाव दिखाई देता है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना चाहिए।
डॉक्टर बच्चे की उम्र, वजन, लंबाई, भोजन की आदत और स्वास्थ्य की स्थिति देखकर जरूरत के अनुसार आगे की जांच या सलाह दे सकते हैं।
बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चे को आयरन, कैल्शियम, विटामिन या दूसरे सप्लीमेंट देना उचित नहीं है।

बच्चों के लिए 1098 हेल्पलाइन की जानकारी

अगर किसी बच्चे को सुरक्षा, देखभाल या सहायता की जरूरत है, तो भारत में Child Helpline 1098 के बारे में जानकारी उपलब्ध है।
यह हेल्पलाइन बच्चों से जुड़ी सहायता और सुरक्षा के मामलों के लिए है। सामान्य स्वास्थ्य या पोषण संबंधी समस्या के लिए बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना अधिक उचित है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या सही पोषण न मिलने से बच्चे का विकास रुक सकता है?

लंबे समय तक पर्याप्त पोषण न मिलने से बच्चे की वृद्धि और विकास प्रभावित हो सकता है। हालांकि, बच्चे की लंबाई और वजन पर आनुवंशिकता तथा अन्य स्वास्थ्य कारणों का भी प्रभाव पड़ता है।

बच्चों के लिए सबसे जरूरी पोषक तत्व कौन से हैं?

बच्चों के लिए प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, स्वस्थ वसा, विटामिन, खनिज और पानी सभी महत्वपूर्ण हैं। किसी एक पोषक तत्व पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार देना बेहतर होता है।

क्या केवल दूध से बच्चे को पूरा पोषण मिल सकता है?

नहीं। दूध कई जरूरी पोषक तत्व देता है, लेकिन बच्चे की उम्र के अनुसार उसे अलग-अलग खाद्य पदार्थों से संतुलित पोषण की जरूरत होती है।

बच्चा बार-बार कमजोर क्यों रहता है?

कमजोरी के पीछे पोषण की कमी के अलावा एनीमिया, नींद की कमी, संक्रमण या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। लगातार कमजोरी रहने पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

बच्चे को फल और सब्जियां कितनी देनी चाहिए?

इसकी मात्रा बच्चे की उम्र और उसकी कुल डाइट पर निर्भर करती है। सामान्य रूप से रोज के भोजन में अलग-अलग प्रकार के फल और सब्जियां शामिल करने की कोशिश करनी चाहिए।

निष्कर्ष

बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए पर्याप्त और संतुलित भोजन बहुत जरूरी है। सही पोषण बच्चे के शरीर को बढ़ने, रोजमर्रा की गतिविधियां करने और सामान्य स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करता है।
माता-पिता को बच्चे के भोजन में दाल, अनाज, फल, सब्जियां, दूध या अन्य उपयुक्त खाद्य पदार्थ और प्रोटीन के स्रोत शामिल करने की कोशिश करनी चाहिए। साथ ही बच्चे की उम्र और जरूरत के अनुसार भोजन देना भी जरूरी है।
अगर बच्चे के वजन, लंबाई, भूख, ऊर्जा या स्वास्थ्य में लगातार कोई समस्या दिखाई दे, तो खुद से दवा या सप्लीमेंट देने के बजाय बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे सही कदम है।
ध्यान दें: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी बच्चे में गंभीर या लगातार स्वास्थ्य समस्या होने पर योग्य डॉक्टर से व्यक्तिगत सलाह लें।

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